बेबसी Powerlessness
बेबसी वर्तमान समय में मानव जीवन के सामने एक ऐसा परिवेश उभर कर सामने आया है । जो उसके लिए जीवन जीने से लेकर बहुत ही कठिनाई भरा समय है। तथा उससे इस जीवन को उबार पाने के लिए बहुत ही मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। तथा मानव को पहले जिस परिवेश में ढलना आ गया वह उसी परिवेश में तथा उसी के अनुरूप काम करता रहता है परंतु नए वातावरण में सामंजस्य स्थापित करने के लिए उसे सभी काम आना बहुत ही जरूरी है। जैसे उदाहरण के रूप में सामने आने लग गया कि वर्तमान में एक वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान लोगों के सामने रोजी रोटी के लाले पड़ने लग गए। लोग देश-विदेश एक राज्य से दूसरे राज्य एक शहर से दूसरे शहर एक गांव से दूसरे गांव में लाखों लोग पलायन कर रहे हैं। तथा इस पलायन की अवधि के दौरान अपने सपनों को अपने मन में संजोकर जब यह लोग गांव से निकले थे एक शहर से दूसरे शहर में कमाने के लिए गए थे तब अपने सपनों की गठरी को अपने सर पर लाद कर लाए थे परंतु आज ओ सपनों की गठरी का वजन ईतना हो गया कि वह सिर पर ढो भी नहीं सकता है। तथा अपने बच्चों के सपने अपने मां-बाप के सपने उससे जवाब मांगते हैं ? और उसका एक निरुत्त...
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